Tuesday, July 28, 2015

दर्शन को तरसे प्यासी आखियां,
छम छम बरसे प्यासी आखियां,
मेरे दुःख ओ दर्द मिटाती क्यों नही,
दर्शन देने के लिये आती क्यों नही।
मेरी माँ ---वैष्णो माँ ----मेरी माँ ---
जिंदगी का क्या ये गमों की पिटारी है,
ख़ुशी की तलाश में फिरे मारी मारी है,
वैष्णो माँ तू जलवा दिखाती क्यों नही,
दुःख दर्दों को दूर परे हटाती क्यों नही।
मेरी माँ ----वैष्णो माँ -------मेरी माँ
रैना"को तो सिर्फ है तेरा ही विश्वास माँ,
दर्शन दे के मिटा दे जन्मों की प्यास माँ,
तेरी राहों में पड़े हैं माँ उठती क्यों नही,
माँ तू अपने गले से लगाती क्यों नही।
मेरी माँ ------वैष्णो माँ ------मेरी माँ
सुप्रभात जी ------------जय जय माँ  

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