ग़ज़ल
याद तेरी बावफ़ा क्यों तुम वफ़ा करते नही,
दोस्ती का हक़ भला क्यों तुम अदा करते नही।
तुम तबीबो थे मिरे किस बात पे रूठे सनम,
दर्द से हम मर रहे क्यों तुम दवा करते नही।
मांगते हैं खैर तेरी तू सलामत हो सदा,
बददुआ हम दे तुझे हरगिज खता करते नही।
जां मिरी हो तुम कभी होता मुझे एहसास है,
फिर भला क्यों तुम हमें खुल के मिला करते नही।
काश रैना" हम कभी तन्हा मिले कुछ चैन से,
फूल किस्मत के कभी हर दिन खिला करते नही। रैना"