आजकल खालिस न मोहब्बत होती,
मोहब्बत में भी अब सियासत होती।
फ़क़त आंखें ही न जोर मजबूर करती
इसमें तो कुछ दिल की शरारत होती।
किसी का दिल तोड़ के खूब हंसना,
इश्क में इसकी तो न इजाजत होती।
सियासतदां हैं बहुत कमजोर आशिक,
वर्ना देश की ऐसी तो न हालत होती।
मेहनत तो अपना रंग दिखा देती है,
लेकिन फिर भी जरूरी किस्मत होती।
वक़्त के हिसाब से बदल लेता कपड़े,
काश रैना"की भी ऐसी आदत होती। रैना"
मोहब्बत में भी अब सियासत होती।
फ़क़त आंखें ही न जोर मजबूर करती
इसमें तो कुछ दिल की शरारत होती।
किसी का दिल तोड़ के खूब हंसना,
इश्क में इसकी तो न इजाजत होती।
सियासतदां हैं बहुत कमजोर आशिक,
वर्ना देश की ऐसी तो न हालत होती।
मेहनत तो अपना रंग दिखा देती है,
लेकिन फिर भी जरूरी किस्मत होती।
वक़्त के हिसाब से बदल लेता कपड़े,
काश रैना"की भी ऐसी आदत होती। रैना"
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