नीली नीली आंखों से जाम छलकता है,
खोले जुल्फें तो सूरज रंग बदलता है।
कामनी जो तुम्हें देखे तो शरमा जाये,
देख कर चांदनी का दम निकलता है।
तेरे हुस्न की नर्म किरणें जहां पड़ती,
देखो तो कहीं पत्थर भी पिगलता है।
घर से जब तुम बन ठन के निकले हो,
धीरे धीरे आशिक का दिल जलता है।
राधा रानी तो कृष्ण की दीवानी हुई,
जलता रहे जो भी बेवजह जलता है। राधा
खोले जुल्फें तो सूरज रंग बदलता है।
कामनी जो तुम्हें देखे तो शरमा जाये,
देख कर चांदनी का दम निकलता है।
तेरे हुस्न की नर्म किरणें जहां पड़ती,
देखो तो कहीं पत्थर भी पिगलता है।
घर से जब तुम बन ठन के निकले हो,
धीरे धीरे आशिक का दिल जलता है।
राधा रानी तो कृष्ण की दीवानी हुई,
जलता रहे जो भी बेवजह जलता है। राधा
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