Saturday, July 4, 2015

कवि दूसरों पर लिखते है आज कवियों के बारे में सुनो
पत्रकार -जनाब आप बहुत अच्छे कवि है??
 फिर आप अपने नाम के साथ कवि क्यों नही लगाते।
कवि -बात ऐसी है  आजकल फर्जी डिग्री के जैसे ,
अधिकतर कवि फर्जी तिगड़म बाज चालू होते है,
कहने को ही इंसान ????????
वो लोमड़ी के जैसे शातिर चालाक,
खूंखार भेड़िये काले काले भालू होते है। 
नेता को पटाने में माहिर लिखते कम ज्यादा छपवाते है,
पुरस्कार पाने में सब से आगे खड़े नज़र आते है।
वैसे वो स्टेज पर तो बोल न पाते है,
लेकिन अपनी कविता नेता को जरूर सुनाते है।
पुरस्कार की लिस्ट में वही से अपना नाम डलवाते है।
ऐसे स्वंभू कवि खुद को कवियों का सरदार बताते है,
उभरते कवियों को पैसे लेकर ही स्टेज पर चढ़ाते है।
बोलिये कवि सरदार की जय। रैना"

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