Wednesday, July 8, 2015

मेरे हिस्से में हसीं वो जमाना नही आया,
आईना देख कर हमें मुस्काना नही आया।
आंख खुलने से पहले ही टूटे हसीन सपनें,
इल्ज़ाम हम पे सपने सजाना नही आया।
मेहनत में कमी न किस्मत धोखा दे गई,
नजारों को अपने घर बुलाना नही आया।
बागवां से गिला शिकवा करे भी तो कैसे,
अपना दर्द किसी को सुनाना नही आया।
रीनू" हम जिन्दगी की बाजी हार गये है,
तड़फते रहे खुद को हंसाना नही आया। रीनू"

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