शनि-रवि -स्वैच्छिक मुक्तक
हमने भी कुछ कमा लिया होता,
गर उससे दिल लगा लिया होता,
यूं न भटकते हम राहों में "रैना"
उसने पलकों पे बैठा लिया होता।रैना"
हमने भी कुछ कमा लिया होता,
गर उससे दिल लगा लिया होता,
यूं न भटकते हम राहों में "रैना"
उसने पलकों पे बैठा लिया होता।रैना"
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